Thursday, August 6, 2009

गदर..





निखरे हो माटी से , माटी मे बिखरोगे

गदर से नन्हीसी हासील क्या कर पाओगे


चांद पाने की कशीश मे रैना सारी बीत गय़ी,

अदाकारीयोकी भीड मे मैफ़िले जमाना भूल गये.


बीच उन्गलीयो के सागर समाते रह गये,

किनारे पर बैठकर आन्खोमे समाना भूल गये.


यलगारो और पुकारो में सासे सिसकती रह गयी

पलखे मिचोए किसी पेड तले सांसे लेना भूल गये.


दलीललों और दर्ख्वास्तों से दरबार तेरा गुंज दिया,

ंमुस्कराकर पल दो पल गुफ़्तगु करना भूल गये.


नशे में होकर धुत कब तक यूं थिरकोगे,

माटी से निखरे हो माटी में बिखरोगे.

4 comments:

wildstriker said...

:P shud lekhan woh bhi hindi mein waah kya baat hain.iski umeed nahin thi.

tejashri said...

waah waah......very good yaar.....majja aa gaya....

keerti said...

teri hindi kabse sughar gayi?....jokes apart, its nice one

Natasha said...

Maati se Nikhre Hon...Maati mein bikhroge..very nice!! You have mastery over Hindi too..WoW!! Now, thats wot we call a 'All Rounder'...Nice Creation Sanket!!